1) समास (दो या दो से अधिक शब्दों से मिलकर बने हुए एक नवीन एवं सार्थक शब्द को समास कहते हैं।) 2) तत्पुरुष समास :इस समास में दूसरा पद (उत्तर पद / अंतिम पद) प्रधान होता है इसमें कर्ता और संबोधन कारक को छोड़कर शेष छ: कारक चिन्हों का प्रयोग होता है... जैसे - कर्म कारक, करण कारक, सम्प्रदान कारक, अपादान कारक, सम्बन्ध कारक, अधिकरण कारक…उदाहरण : (विद्यालय) - विद्या के लिए आलय , (राजपुत्र) - राजा का पुत्र, (मुंहतोड़) - मुंह को तोड़ने वाला, (चिड़ीमार) - चिड़िया को मारने वाला , (जन्मांध) - जन्म से अँधा 3) कर्मधारय समास : इसमें समस्त पद सामान रूप से प्रधान होता है इसके लिंग, वचन भी सामान होते हैं इस समास में पहला पद विशेषण तथा दूसरा पद विशेष्य होता है विग्रह करने पर कोई नया शब्द नहीं बनता...उदाहरण : (चन्द्रमुख) - चन्द्रमा के सामान मुख वाला - विशेषता, (दहीवड़ा) - दही में डूबा बड़ा - विशेषता, (गुरुदेव) - गुरु रूपी देव - विशेषता , (चरण कमल) - कमल के समान चरण - विशेषता , (नील गगन) - नीला है जो असमान - विशेषता 4) द्विगु समास : द्विगु समास में पहला पद संख्यावाचक होता है विग्रह करने पर समूह का बोध होता है...उदाहरण : (त्रिलोक) - तीनो लोकों का समाहार, (नवरात्र) - नौ रात्रियों का समूह , (अठन्नी) - आठ आनो का समूह , (दुसूती) - दो सुतों का समूह, (पंचतत्व) - पांच तत्वों का समूह 5) बहुव्रीहि समास : इस समास में कोई भी पद प्रधान न होकर अन्य पद प्रधान होता है विग्रह करने पर नया शब्द निकलता है पहला पद विशेषण नहीं होता है विग्रह करने पर समूह का बोध भी नहीं होता है... उदाहरण : (त्रिनेत्र) - भगवान शिव, (वीणापाणी) - सरस्वती, (श्वेताम्बर) - सरस्वती , (गजानन) - भगवान गणेश, (गिरधर) - भगवान श्रीकृष्ण 6) द्वंद्व समास : इसमें दोनों पद प्रधान होते हैं। विग्रह करने पर बीच में 'और' / 'या' का बोध होता है...उदाहरण : (पाप-पुण्य) - पाप और पुण्य, (सीता-राम) - सीता और राम , (ऊँच-नीच) - ऊँच और नीच , (खरा-खोटा) - खरा या खोटा, (अन्न-जल) - अन्न और जल  7) अव्ययीभाव समास : इस समास में पहला पद (पूर्व पद) प्रधान होता है और पूरा पद अव्यय होता है...इसमें पहला पद उपसर्ग होता है जैसे अ, आ, अनु, प्रति आदि...उदाहरण: (आजन्म) - जन्म पर्यन्त, (यथावधि) - अवधि के अनुसार, (यथाक्रम) - क्रम के अनुसार

순위표

비주얼 스타일

옵션

템플릿 전환하기

자동 저장된 게임을 복구할까요?